ये अपना देश है यहां तो घुटन महसूस होती है। आज से दो महीने पहले मैं अपने एक नये सफर पर निकली मुझे एक छोटी सी नौकरी मिली जिसके लिए रोज मुझे लगभग डेढ़ घंटे का सफर टेÑन, आॅटो और कुछ खुद से तय करना पड़ता है। मैं आजाद पंरिदा खुशी-खुशी अपनी नजर से सामाज देखेने निकल पड़ीआज पूरे दो महीने हो चुके है और इन दो महीनों ने मुझे जहां मेरी जिंदगी की पहली कमाई, मेरा पहला आॅफिस, मेरा पहला काम दिया है वही इस समाज ने मुझे बहुत रूलाया भी है। मुझे यकीन नही होता कि ये मेरा देश मेरा समाज है जो हर वक्त किसी ना किसी को कुचलता रहता है। मैं बड़ी खुशमिजाज आज एक मुरझाया हुआ फूल बन चुकी हूं। मुझे 65 साल पुराने इस आजाद देश में घुटन महसूस होती है। टेÑन के इंतजार में स्टेशन पर घूरती नजरें, और जब कहां जाएं जरा सुधर जाओं तो बेशर्मी भरे सवाल कि हमनें किया क्या है?, हर वक्त वो बयानबाजी जो चार लड़के अपने गुप्र मैं खड़े होकर मुझ जैसी लड़की पर करते नजर आते है। वो अपने पिता की उम्र के समान अकंल जो बेशर्मी भरी नजरों से देखते है। मैं रोना नही चाहती, मैं रुकना नही चाहती बस चाहती ये हूं कि इन जानवरों का इलाज हो जाएं। क्योकि ये एक ऐसा माहौल बना रहे है जो ये कहने पर मजबूर कर रहे है कि बाहर निकलने से बेहतर घर में ही दफन हो जाओ। ऐसा नही कि इस सफर मैं मुझे सिर्फ जानवरों से ही पाला पड़ा है। दुनिया अच्छाई से चलती है चाहे वो सिर्फ 2 प्रतिशत ही क्यो ना हो और मुझे वो भी मिलें पर इन बाकी के जानवरों का क्या जो घर से बहुत सारी लड़कियों को निकलने ही नही देते। लोग दिल्ली जैसी घटना पर भी जब लड़कियों की कमी निकालते है पर उसके खात्में की बात नही करते हैं। अफसोस तो जता देते है पर अपने अंदर झाकते नही कि हम भी इसके कितने जिम्मेदार है। कभी तो सोचती हूं जानवर भी इन लोगों के लिये सही शब्द नही है क्योकि जानवर भी ऐसी हरकतें नही करते है। आप ही बताइये इन सूट बूट में कॉलेज और आॅफिस जाने वाले इन ****** को मैं क्या कहूं। इनको इनकी हरकत का एहसास दिलाने के लिए क्या किया जाएं ये मोटी चमड़ी वाले है इसलिए यहां जोर से मार करनी पड़ेगी। पूरे पुरुष वर्ग के नाम पर धब्बा लगाते ये****** और की नही तो अपने वर्ग का तो लिहाज तो रख ही सकते है क्योकि इन्हें बर्दाश नही कि कोई इन पर और इनके वर्ग पर अंगुली उठाए। बस अब आप से गुजारिश है कि बिना कुछ करें ही सुधर जाओं नही तो वो होगा जो आपने सोचा नही होगा क्योकि गुस्से का अंबार एक दिन जरुर फूटता है।
Monday, 3 June 2013
Saturday, 18 May 2013
Friday, 1 March 2013
aawaz: na jane kis gali ko chal padi hu maishok e dedar...
aawaz: na jane kis gali ko chal padi hu mai
shok e dedar
...: na jane kis gali ko chal padi hu mai shok e dedar ki khatir abhi bhut door tak h jaana....
shok e dedar
...: na jane kis gali ko chal padi hu mai shok e dedar ki khatir abhi bhut door tak h jaana....
Wednesday, 19 December 2012
MANAVTA KI TO SARM KRO...
सीने में आग लगी , जलज्लाहत सी मची है,,, सवाल बस ये है उसकी आबरु के साथ खिलवाड़ कर के तूने क्या अपनी मर्दानगी दिखाई है !!!!!1
देश की राजधनी दिल्ली में जों हुआ है वो हमारे समाज के लिए नया नहीं है। आये दिन कुछ न कुछ ऐसी शर्मिंदगी की घटनाए हमारे सामने आती रहती है बस सवाल ये है कि ये घटना आखरी होगी । समाज, सरकार, प्रशासन, सब घेरे में है । समाज में जितनी भागीदारी पुरुष की है उतनी ही महिला की है परन्तु एक महिला को हर वक़्त अपने आप को साबित करना पड़ता है। महिलाये को घर से लेकर बाहर तक अपनी पहचान बनाने में हमेशा परीक्षा देनी पड़ती है। साफ है की नीतियों की कमी है। आज जब देश में एक लड़की की इज्जत के साथ खिलवाड़ हो चुकी है तो संसद से लेकर सड़क तक आवाज उठ रही है , सब अपना विरोध जता रहे है मीडिया भी पूरा कवरेज दे रहा है, तो क्या इस बार जरुर दरिंदो को सजा मिलेगी। अब वक़्त आ गया है कि घडयाली आसू का दिखावा ना कर के कुछ कदम उठाये जो आगे अपराध करने वालों के लिए सबक हो। समाज में मानवता का पालन किया जाये अगर आप के सामने कुछ गलत हो रहा है तो आप उस का विरोध करो। कानून ऐसी सजा दे की कोई अपराध करने की सोच भी ना सके। क्योकि जब तक डर नहीं होगा तब तक इससे काबू नहीं पाया जा सकता है।
Wednesday, 28 November 2012
aawaz: Gurupurab di sabnu lakh lakh vadhaiya.........Rab ...
aawaz: Gurupurab di sabnu lakh lakh vadhaiya.........Rab ...: Gurupurab di sabnu lakh lakh vadhaiya.........Rab di meher twede te bani re....
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